Home ফ্যাক্ট ফাইল পঞ্চায়েতের পাঁচ কাহন পৌর বার্তা জেলার চালচিত্র চাষী ভাই বলছি শরীর স্বাস্থ্য জেলার সেনাপতি মাঠে ময়দানে বিনোদন সম্পাদকীয় কলম
BREAKING NEWS
জনসংযোগ দিবসে সাধারণ মানুষের অভাব-অভিযোগ শুনলেন ফলতার বিধায়ক দেবাংশু পান্ডা, সমস্যা সমাধানে উদ্যোগ   •   সোনাখালীতে বিজেপির বুদ্ধিজীবী সম্মেলন, সাংগঠনিক উদ্যোগে নজর কাড়লেন প্রদীপ সরদার   •   একের পর এক গ্রেপ্তার, উঠছে পুরনো অভিযোগ—সাধারণ মানুষের প্রশ্ন, কবে মিলবে প্রকৃত বিচার?   •   ফলতা SEZ-কে কেন্দ্র করে দক্ষিণবঙ্গের শিল্পায়নের নতুন পরিকল্পনা, উন্নয়ন ও কর্মসংস্থানের স্বপ্ন তুলে ধরলেন ফলতার বিধায়ক দেবাংশু পান্ডা   •   আবাস যোজনার বাড়ির টাকা পেতে ২০ হাজার টাকা ঘুষ চাওয়ার অভিযোগ! প্রতিবাদ করায় রাজমিস্ত্রিকে মারধর, কুয়োয় ফেলে খুনের হুমকি, বিষ্ণুপুর থানায় অভিযোগ   •   সৌন্দর্য ও গ্ল্যামারের মেলবন্ধনে নজর কাড়লেন আয়েশা খান, তাঁর আকর্ষণীয় উপস্থিতিতে মুগ্ধ অনুরাগীরা

'दो महीने हो गए, सब बेकार...' दिशा सालियान केस में सीबीआई की जांच पर भड़के वकील नीलेश ओझा, अदालत की निगरानी में जांच की मांग

05 Nov 2026
07:33 PM


ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,मुंबई: दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब छह साल पुराने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच और उसकी गति को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। दिशा सालियान के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील नीलेश ओझा ने जांच की प्रगति पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि मामले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

मामले में ताजा घटनाक्रम यह है कि जांच को अदालत की निगरानी में कराने की मांग वाली याचिका सीबीआई अदालत में दर्ज हो गई है। इस याचिका पर 18 नवंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई है। इससे दिशा सालियान मामले में एक बार फिर कानूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। <Cite refs={["turn252234search0","turn252234search3"]}/>

सीबीआई की जांच पर नीलेश ओझा ने उठाए सवाल

वकील नीलेश ओझा का कहना है कि घटना को छह साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उनके अनुसार तीन महत्वपूर्ण गवाहों के बयान निर्धारित 60 दिनों की अवधि के भीतर दर्ज नहीं किए गए। उन्होंने इसे गंभीर प्रक्रियात्मक चूक बताते हुए अदालत से जांच की निगरानी करने का अनुरोध किया है।

ओझा ने सुप्रीम कोर्ट के कानूनी प्रावधानों और पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित पक्ष अदालत से जांच की निगरानी की मांग कर सकता है। उनके मुताबिक, इसी आधार पर सीबीआई अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्ज कर लिया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारियां जांच एजेंसी के सामने रखी गई हैं, इसलिए इन सभी पहलुओं की विधिवत जांच होनी चाहिए।

तीन अहम गवाहों के बयान को लेकर उठाए सवाल

नीलेश ओझा ने दावा किया है कि इस मामले में तीन महत्वपूर्ण गवाहों के बयान निर्धारित समय के भीतर दर्ज नहीं किए गए। उन्होंने दो अधिकारियों के बयान दर्ज कराने की मांग भी की है। उनका आरोप है कि इन मांगों के बावजूद अभी तक आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई है।

ओझा के अनुसार, आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली से संबंधित मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड और अन्य जानकारियां भी अदालत के सामने रखी गई हैं। उन्होंने इन रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

हालांकि, इन लोगों के नाम का उल्लेख या वकील की ओर से लगाए गए आरोप अपने आप में किसी अपराध में उनकी संलिप्तता साबित नहीं करते। इसकी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही हो सकती है। <Cite refs={["turn252234search0","turn252234search3"]}/>

18 नवंबर को सीबीआई अदालत में होगी सुनवाई

इस पूरे मामले में अब 18 नवंबर की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी दिन सीबीआई अदालत में जांच को न्यायिक निगरानी में कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी।

वकील नीलेश ओझा का कहना है कि अदालत की निगरानी से जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और लंबित पहलुओं पर ध्यान देने में मदद मिल सकती है। अब देखना होगा कि अदालत इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।

19 नवंबर को आजाद मैदान में जनसभा का ऐलान

नीलेश ओझा ने दिशा सालियान मामले को लेकर व्यापक जनसमर्थन जुटाने की भी घोषणा की है। उनके मुताबिक, 19 नवंबर को मुंबई के आजाद मैदान में शाम चार बजे जनसभा आयोजित की जाएगी।

उन्होंने देशभर के सांसदों को पत्र भेजकर इस मामले में सहयोग करने की अपील करने की बात कही है। ओझा चाहते हैं कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की पूरी तरह जांच हो।

8 जून 2020 को हुई थी दिशा सालियान की मौत

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में एक आवासीय इमारत से गिरने के बाद हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। उनकी मौत के कुछ दिनों बाद ही सुशांत सिंह राजपूत की भी मृत्यु हो गई थी। इन दोनों घटनाओं ने देशभर में व्यापक चर्चा और कई सवाल खड़े किए थे।

शुरुआत में दिशा की मौत को आकस्मिक मृत्यु के रूप में दर्ज किया गया था। बाद में उनके पिता सतीश सालियान ने जांच पर सवाल उठाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को दिशा की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने, उनके पिता का बयान दर्ज करने और प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 13 सितंबर को सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की। इसमें हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और साक्ष्य नष्ट करने सहित कई गंभीर आरोपों से संबंधित धाराएं शामिल की गईं। ये प्राथमिकी में दर्ज आरोप हैं, साबित अपराध नहीं। <Cite refs={["turn252234search6","turn252234search7"]}/>

अब जांच की दिशा पर टिकी निगाहें

दिशा सालियान मामले में नए कानूनी घटनाक्रम के बाद अब सीबीआई की जांच, गवाहों के बयान और अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों पर सभी की निगाहें टिकी हैं। एक तरफ परिवार की ओर से निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जांच एजेंसी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ानी है।

18 नवंबर की सुनवाई और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो सकेगा कि अदालत जांच की निगरानी को लेकर क्या निर्णय लेती है। फिलहाल इस मामले में किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।