ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,भुवनेश्वर: ओडिशा में हाल ही में आए चक्रवात ‘अर्नब’ और उसके बाद हुई भारी बारिश एवं बाढ़ ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्राकृतिक आपदा के कारण हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई इलाकों में कृषि भूमि, मकान, सड़कें, पुल, बिजली व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर में उच्चस्तरीय बैठक कर नुकसान, राहत कार्यों और पुनर्वास की स्थिति की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री की बैठक में प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति, किसानों को हुए नुकसान, क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को दोबारा बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। राज्य सरकार का कहना है कि आपदा प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना और सामान्य जनजीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाना उसकी प्राथमिकता है।
चक्रवात और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की आठ सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टीम ओडिशा पहुंची थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव रवि शंकर के नेतृत्व में इस टीम ने 2 से 4 नवंबर के बीच प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। टीम ने गंजाम और गजपति जिलों में कृषि भूमि, मकानों, सड़कों और अन्य सरकारी एवं सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की। बाढ़ के कारण कई गांवों में भारी मात्रा में रेत और गाद जमा हो गई है। विशेष रूप से गंजाम जिले में रुशिकुल्या नदी के उफान से आसपास के इलाकों में व्यापक नुकसान हुआ है। कई खेतों, सड़कों, मकानों और सरकारी भवनों पर रेत की मोटी परत जम गई है।
केंद्रीय टीम ने यह भी बताया कि कुछ मकान पूरी तरह ढहे नहीं हैं, लेकिन बाढ़ के पानी के कारण उनकी संरचना कमजोर हो गई है। ऐसे मकानों का भी विस्तृत सर्वेक्षण जरूरी है।
राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, चक्रवात और उसके बाद आई बाढ़ से गंजाम, गजपति और कंधमाल सहित तीन जिलों में लगभग 2,526 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता मांगी है।
इसके अलावा ओडिशा सरकार ने भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता की मांग भी रखी है। इस राशि का उपयोग सिंचाई व्यवस्था, नदी तटबंधों और अन्य महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं के पुनर्निर्माण तथा मजबूती के लिए किए जाने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने केंद्रीय टीम से आग्रह किया कि उसकी रिपोर्ट में तत्काल राहत और पुनर्वास के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान की जरूरत को भी प्रमुखता दी जाए।
राज्य सरकार ने चक्रवात और भारी बारिश से प्रभावित परिवारों तथा किसानों के लिए विशेष सहायता पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 किलोग्राम चावल और 2,500 रुपये नकद सहायता देने की घोषणा की गई है।
वहीं जिन किसानों की फसल को 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें कृषि इनपुट सब्सिडी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
घोषित सहायता के अनुसार:
असिंचित कृषि भूमि के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
सिंचित कृषि भूमि के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर।
बहुवर्षीय फसलों के नुकसान के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
इस सहायता का उद्देश्य किसानों को खेती दोबारा शुरू करने और आर्थिक नुकसान से उबरने में मदद करना है।
5 नवंबर को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गंजाम जिले के विधायकों के साथ भी लोक सेवा भवन में बैठक की। इस दौरान राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी और मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक भी मौजूद रहे।
बैठक में विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चक्रवात और बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी सुविधाओं की जल्द बहाली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और प्रशासन को राहत कार्यों में तेजी बनाए रखनी होगी।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ओडिशा को बार-बार चक्रवात, बाढ़ और भीषण गर्मी जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। इन आपदाओं से न केवल लोगों की जान-माल और आजीविका प्रभावित होती है, बल्कि राज्य के विकास कार्यों पर भी असर पड़ता है।
इसलिए केवल अस्थायी मरम्मत और राहत कार्य पर्याप्त नहीं हैं। राज्य में ऐसी मजबूत आधारभूत संरचना विकसित करने की जरूरत है, जो भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर सके।
केंद्रीय टीम ने भी रुशिकुल्या नदी में लंबे समय से जमा गाद और रेत को हटाने के लिए स्थायी उपायों की आवश्यकता बताई। टीम के अनुसार, घर-घर जाकर नुकसान का सर्वेक्षण करने से वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। विस्तृत नुकसान आकलन पूरा करने में सात से आठ दिन और लगने की संभावना जताई गई थी।
ओडिशा सरकार ने केंद्र से तत्काल वित्तीय सहायता के साथ दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन योजनाओं में सहयोग की मांग की है। राज्य सरकार की ओर से प्रारंभिक नुकसान का ज्ञापन केंद्रीय टीम को सौंपा गया है। केंद्रीय टीम की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से मिलने वाली सहायता का आकलन किया जाएगा।
फिलहाल ओडिशा के प्रभावित जिलों में राहत, मरम्मत और पुनर्वास का काम जारी है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क और बिजली आपूर्ति बहाल की जा चुकी है, लेकिन कृषि भूमि, मकानों और सिंचाई व्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की समीक्षा बैठकों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार तत्काल राहत के साथ भविष्य में आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए स्थायी समाधान पर भी ध्यान दे रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रभावित परिवारों, किसानों और ग्रामीण इलाकों तक घोषित सहायता कितनी तेजी से पहुंचती है और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का पुनर्निर्माण किस समय सीमा में पूरा होता है।