ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय :नई दिल्ली : दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों और युवा प्रदर्शनकारियों ने अपनी उम्मीदों, चिंताओं और संकल्पों को साझा किया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाना है।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने प्रदर्शन से पहले युवाओं की भागीदारी पर खुशी जताई। उन्होंने इसे Gen-Z यानी युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़ी लड़ाई बताते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए लोगों से एकजुट होने की अपील की। उनके मुताबिक, युवाओं की सक्रिय भागीदारी देश के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और बदलाव की जिम्मेदारी लेने का संदेश दिया। संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल शामिल हैं। आलोचकों ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है। वहीं, निर्वाचन आयोग और BJP ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
प्रदर्शन से पहले CJP से जुड़े कुछ नेताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की बात कही। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य लोकतांत्रिक अधिकारों और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने निर्धारित प्रक्रिया और पूर्व प्रदर्शन के दौरान कथित नियम उल्लंघन का हवाला देते हुए 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। <Cite refs={["turn394149news15","turn394149news14"]}/>
प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। समाचार एजेंसियों के अनुसार, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई तथा कुछ इलाकों में यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाए गए। शनिवार को प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें सामने आईं।
CJP समर्थकों की उम्मीद है कि उनकी आवाज चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी बहस को आगे बढ़ाएगी। वहीं, प्रदर्शन को लेकर प्रशासन और आयोजकों के बीच मतभेद ने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के सवाल को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।