ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय ,नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने ज्ञानेश कुमार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और उन पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए।
सागरिका घोष की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब मंगलवार को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। विपक्षी सांसदों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया जाए। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने धरना भी दिया।
सागरिका घोष ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के संदर्भ में घेरा। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली से उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा हुआ है। इसी राजनीतिक बहस के बीच 'बीजेपी के चुनाव आयुक्त' जैसे नारे और आरोप विपक्षी प्रदर्शन का हिस्सा बने हैं। हालांकि, यह विपक्ष का राजनीतिक आरोप है, चुनाव आयोग ने ऐसे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का Special Intensive Revision (SIR) है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी योग्य मतदाता का नाम हटना नहीं चाहिए। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की है।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग अधिकारियों की ओर से दिए गए सुझाव या अलग राय निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि पिछले एक वर्ष में लिए गए उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
सितंबर में सामने आई एक रिपोर्ट के बाद विवाद और गहरा गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कई मौकों पर सवाल उठाए गए थे।
चुनाव आयोग ने बाद में इन टिप्पणियों को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि अलग-अलग विचार होना सामान्य है। आयोग ने फैसलों में सर्वसम्मति होने की बात भी कही।
ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर उठे विवाद का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ मामलों में एकतरफा तरीके से काम किया। अदालत ने इस मामले में रिकॉर्ड देखने और कानून के अनुरूप निर्णय की जांच की बात कही है।
मंगलवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं का चुनाव आयोग की ओर मार्च इसी विवाद की अगली कड़ी रहा। मार्च में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। विपक्षी नेताओं ने इसके बाद धरना देकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर अपनी मांगें दोहराईं।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची में संशोधन और SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक तरफ विपक्ष ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगा रहा है और उनकी भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों और प्रक्रिया का बचाव कर रहा है। अब इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ देश की नजर बनी हुई है।