ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,नई दिल्ली: BRICS Summit 2026 को लेकर कांग्रेस नेता और पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने सरकार पर निशाना साधते हुए एक दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने BRICS की तुलना शादी से करते हुए सवाल उठाया कि अगर अलग-अलग विचारधाराओं और हितों वाले देशों को एक मंच पर साथ लाया जा रहा है, तो क्या यह साझेदारी लंबे समय तक टिक पाएगी?
पवन खेड़ा ने अपने बयान में शादी का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल साथ आ जाने से कोई रिश्ता मजबूत नहीं हो जाता। रिश्ते को चलाने के लिए आपसी भरोसा, समान समझ और लगातार संवाद जरूरी होता है। इसी तर्ज पर उन्होंने BRICS देशों के बीच मौजूद मतभेदों और अलग-अलग रणनीतिक हितों की ओर इशारा किया।
कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय आया है जब BRICS के विस्तार और समूह के भीतर बदलते समीकरणों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। भारत, चीन, रूस समेत BRICS के सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग के साथ-साथ भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं।
पवन खेड़ा के 'शादी' वाले बयान को कांग्रेस की ओर से सरकार की विदेश नीति पर राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है। उनका सवाल मूल रूप से यह है कि क्या अलग-अलग हितों और प्राथमिकताओं वाले देशों का यह गठजोड़ वास्तव में मजबूत और टिकाऊ साझेदारी में बदल पाएगा।
हालांकि, BRICS समर्थक पक्ष का तर्क है कि समूह का उद्देश्य सभी मुद्दों पर एक जैसी राय बनाना नहीं, बल्कि आर्थिक सहयोग, व्यापार, विकास और वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करना है।
ऐसे में पवन खेड़ा का बयान अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। 'शादी नहीं चलेगी' वाली उनकी टिप्पणी के जरिए कांग्रेस ने BRICS के भीतर मौजूद मतभेदों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि इस बयान पर बीजेपी और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।