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दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हस्तशिल्प और कला प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, भारतीय संस्कृति की दिखी झलक

27 Oct 2026
11:09 AM


ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,नई दिल्ली: दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित हस्तशिल्प और कला प्रदर्शनी में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला की खूबसूरत झलक देखने को मिल रही है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक कलाओं, हस्तनिर्मित वस्तुओं और सदियों पुरानी शिल्प परंपराओं को प्रदर्शित किया जा रहा है। प्रदर्शनी में लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़ी कलाकृतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

BRICS शिखर सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन के साथ भारतीय कला और हस्तशिल्प का प्रदर्शन देश की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाने का अवसर प्रदान करता है। यहां प्रदर्शित कलाकृतियां भारतीय कारीगरों की रचनात्मकता, मेहनत और पारंपरिक कौशल को दर्शाती हैं। इन कलाकृतियों में भारतीय कला की विशिष्ट शैली और स्थानीय परंपराओं की छाप देखने को मिलती है।

लकड़ी की नक्काशी ने खींचा ध्यान

प्रदर्शनी में लकड़ी पर की गई नक्काशी विशेष आकर्षण का केंद्र है। लकड़ी को तराशकर उस पर अलग-अलग आकृतियां, डिजाइन और पारंपरिक रूपांकन तैयार करना भारतीय हस्तशिल्प की एक महत्वपूर्ण कला रही है। इस काम में कारीगरों को धैर्य, अनुभव और बारीकियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

लकड़ी की सतह पर उकेरे गए डिजाइन भारतीय शिल्पकारों के कौशल और उनकी कलात्मक सोच को दर्शाते हैं। पारंपरिक औजारों और पीढ़ियों से चले आ रहे तरीकों के जरिए तैयार की गई ऐसी कलाकृतियां भारतीय शिल्प परंपरा की विशिष्ट पहचान मानी जाती हैं।

प्रदर्शनी में इस तरह की कलाकृतियों का प्रदर्शन भारतीय हस्तशिल्प की विविधता को समझने का अवसर देता है। साथ ही, यह भी सामने आता है कि किस प्रकार सामान्य लकड़ी को कुशल कारीगर अपनी मेहनत और कल्पनाशीलता से कलात्मक वस्तु में बदल देते हैं।

भारतीय हस्तशिल्प में झलकती है सांस्कृतिक विविधता

भारत के अलग-अलग राज्यों में हस्तशिल्प की अपनी विशिष्ट पहचान है। कहीं लकड़ी पर नक्काशी की परंपरा प्रचलित है, तो कहीं धातु, मिट्टी, पत्थर, कपड़े और प्राकृतिक रेशों से आकर्षक कलाकृतियां तैयार की जाती हैं। इन कलाओं में स्थानीय इतिहास, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक मान्यताओं की झलक देखने को मिलती है।

दिल्ली में आयोजित इस प्रदर्शनी के माध्यम से पारंपरिक शिल्पकला को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसी प्रदर्शनियां लोगों को भारतीय कलाओं की बारीकियों से परिचित कराने के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने का अवसर भी देती हैं।

कारीगरों की मेहनत और हुनर को मिला मंच

हस्तशिल्प केवल सजावटी वस्तुएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कारीगरों की आजीविका और पारंपरिक ज्ञान से भी जुड़ा हुआ है। कई शिल्पकलाएं पीढ़ियों से एक परिवार या समुदाय के माध्यम से आगे बढ़ती रही हैं। कारीगर अपने अनुभव और कौशल के आधार पर इन परंपराओं को जीवित रखते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के दौरान भारतीय हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने से इन कलाओं को नई पहचान दिलाने और इनके प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही पारंपरिक उत्पादों के लिए नए बाजार और संभावित अवसर तैयार करने की दिशा में भी ऐसे मंच महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

BRICS सम्मेलन में संस्कृति और कला का महत्व

BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के बीच भारतीय कला और हस्तशिल्प का प्रदर्शन सांस्कृतिक पहचान को सामने रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में आर्थिक और कूटनीतिक मुद्दों के साथ मेजबान देश की कला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत भी विशेष महत्व रखती है।

भारतीय हस्तशिल्प की विशेषता उसकी विविधता, पारंपरिक तकनीकों और स्थानीय कलात्मक शैलियों में निहित है। लकड़ी की नक्काशी जैसी कलाएं इस बात का उदाहरण हैं कि किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान और रचनात्मकता मिलकर विशिष्ट कलाकृतियों को जन्म देते हैं।

भारतीय विरासत को संरक्षित करने की जरूरत

आधुनिक तकनीक और बदलते बाजार के दौर में पारंपरिक हस्तशिल्प का संरक्षण महत्वपूर्ण हो गया है। कारीगरों को प्रोत्साहन, उनके उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच और नई पीढ़ी को पारंपरिक कलाओं से जोड़ना इस दिशा में अहम कदम हो सकते हैं।

दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित हस्तशिल्प और कला प्रदर्शनी इसी व्यापक सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती है। लकड़ी की नक्काशी और अन्य पारंपरिक कलाकृतियों के माध्यम से भारतीय शिल्पकारों का हुनर सामने आ रहा है।

कुल मिलाकर, यह प्रदर्शनी भारतीय कला, पारंपरिक शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसके जरिए देश की विविध कलात्मक परंपराओं को पहचान दिलाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को संरक्षित रखने के महत्व को रेखांकित किया जा रहा है।