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जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग, विधानसभा ने केंद्र से उठाई आवाज

30 Sep 2026
11:34 AM

ज़िल्लर वार्ता राष्ट्रीय,श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने केंद्र सरकार से केंद्र शासित प्रदेश का राज्य का दर्जा “तुरंत और जल्द से जल्द” बहाल करने की मांग की है। विधानसभा की यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब इस मुद्दे पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर के निर्वाचित नेतृत्व के बीच लगातार चर्चा होती रही है।

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने और 2019 में राज्य को दो केंद्र शাসित प्रदेश—जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख—में पुनर्गঠित করার পর से राज्य का दर्जा बहाली का प्रश्न राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ है। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 से संबंधित अपने फैसले में विधानसभा चुनाव कराने और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा “यथाशीघ्र और जल्द से जल्द” बहाल करने की बात कही थी। अदालत ने विधानसभा चुनाव के लिए 30 सितंबर 2024 तक की समयसीमा निर्धारित की थी। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्या कहा गया था?

11 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को संवैधानिक रूप से वैध माना था। साथ ही अदालत ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जाएं और राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

अदालत के निर्देश के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए गए और निर्वाचित सरकार का गठन हुआ। लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा अभी भी लंबित है। इसी पृष्ठभूमि में विधानसभा का ताजा प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

अब विधानसभा ने क्यों उठाया मुद्दा?

विधानसभा की मांग का मुख्य आधार यह है कि जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार और विधानसभा के कामकाज के बावजूद प्रदेश अभी भी केंद्र शासित प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था के तहत है। राज्य का दर्जा बहाल होने से निर्वाचित सरकार को अधिक संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकार मिलने की उम्मीद जताई जाती रही है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी कई मौकों पर राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर चुके हैं। जून 2025 में उन्होंने कहा था कि राज्य का दर्जा विधानसभा या सरकार के लिए नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए है। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाता है तो उनकी सरकार उसका स्वागत करेगी। 

परिसीमन, चुनाव और राज्य का दर्जा

जम्मू-कश्मीर की मौजूदा संवैधानिक स्थिति को समझने के लिए 2019 के बाद की घटनाओं को क्रम में देखना जरूरी है। केंद्र सरकार ने पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कराई। परिसीमन आयोग ने 2022 में अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सीटों की संख्या 90 निर्धारित हुई। आयोग ने जम्मू क्षेत्र के लिए 43 और कश्मीर क्षेत्र के लिए 47 विधानसभा सीटों का प्रावधान किया था। 

इसके बाद 2024 में विधानसभा चुनाव हुए और लंबे अंतराल के बाद जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार बनी। इस तरह परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। अब राज्य का दर्जा बहाल करना इस पूरी प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।

तीन चरणों की प्रक्रिया पर चर्चा

2019 के बाद जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस में अक्सर तीन चरणों—परिसीमन, विधानसभा चुनाव और राज्य का दर्जा—का उल्लेख किया गया है। परिसीमन पूरा हो चुका है और विधानसभा चुनाव भी हो चुके हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों का तर्क है कि अब तीसरे चरण यानी पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ना चाहिए।

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर पहले यह कहा गया था कि उचित समय पर इसे बहाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले में भी केंद्र द्वारा राज्य का दर्जा बहाल करने के आश्वासन को दर्ज किया गया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए रखने का फैसला राज्य का दर्जा बहाल होने से प्रभावित नहीं होगा। 

इंतजार कितना लंबा?

राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सबसे बड़ा सवाल अब समय को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार काम कर रही है। इसके बावजूद पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं हुआ है।

यही वजह है कि विधानसभा की मांग में “तुरंत” और “जल्द से जल्द” जैसे शब्दों पर विशेष जोर दिया गया है। समर्थकों का तर्क है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत निर्वाचित सरकार के गठन के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने में और देरी नहीं होनी चाहिए।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति और प्रशासनिक परिस्थितियों को इस विषय में महत्वपूर्ण मानती रही है। इसलिए राज्य का दर्जा बहाल करने का सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा, प्रशासन और संवैधानिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।

राज्य का दर्जा बहाली से क्या बदलेगा?

पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर की प्रशासनिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव होंगे। केंद्र शासित प्रदेश की तुलना में राज्य सरकार को संविधान के तहत अधिक अधिकार प्राप्त होंगे। हालांकि, जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक स्थिति 2019 के बाद पहले जैसी नहीं होगी और अनुच्छेद 370 से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का फैसला अलग मुद्दा है। 

इसलिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग से अलग समझना जरूरी है। वर्तमान बहस मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का संवैधानिक दर्जा देने पर केंद्रित है।

आगे क्या?

विधानसभा के प्रस्ताव के बाद अब केंद्र सरकार के रुख पर नजर रहेगी। जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार लगातार राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रही है, जबकि केंद्र की ओर से इसके लिए समय और प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्णय का इंतजार है।